सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम्। हिंदी अर्थ सहित

॥श्री गणेशाय नमः॥

॥ॐ श्री दुर्गायै नमः:

🙏 जय माताजी 🙏
श्री सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र जगदम्बा माँ दुर्गा की स्तुति करने वाले सात पवित्र संस्कृत श्लोकों का स्तोत्र है। इस स्तोत्र में माँ दुर्गा की महामाया शक्ति, करुणा, रक्षा तथा भक्तों के दुःख और भय दूर करने वाली दिव्य महिमा का वर्णन किया गया है।
माँ दुर्गा को समर्पित इस पवित्र स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्त को मानसिक शांति, साहस और माँ के प्रति भक्ति में वृद्धि होने की भावना प्राप्त होती है।

॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम् ॥ 
॥ शिव उवाच ॥
देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनि।
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः॥१॥

अर्थ: हे देवी! आप भक्तों को सहज ही प्राप्त होने वाली और सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली हैं। कलियुग में कार्यसिद्धि के लिए कृपया कोई उपाय बताइए।


॥ देव्युवाच ॥
शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥२॥

अर्थ: हे देव! सुनिए, मैं कलियुग में सभी इच्छित मनोरथों को सिद्ध करने का साधन बताती हूँ। आपके प्रति स्नेह के कारण ही मैं इस अम्बास्तुति को प्रकट कर रही हूँ।


॥ विनियोगः ॥
ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवताः, श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः।

अर्थ: इस श्री दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र मंत्र के ऋषि नारायण हैं, छन्द अनुष्टुप् है तथा श्री महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती इसकी देवताएँ हैं। श्री दुर्गा की प्रसन्नता के लिए सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ में इस मंत्र का विनियोग किया जाता है।


ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥१॥

अर्थ: वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के चित्त को भी बलपूर्वक अपनी ओर आकर्षित करके मोह में डाल देती हैं।


दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः।
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या।
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥२॥

अर्थ: हे माँ दुर्गे! आपका स्मरण करने पर आप सभी प्राणियों का भय दूर कर देती हैं। शांत और स्वस्थ चित्त से आपका स्मरण करने वालों को आप अत्यंत शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। हे दरिद्रता, दुःख और भय को दूर करने वाली देवी! सभी का उपकार करने के लिए सदैव दयालु रहने वाली आपके समान दूसरी कौन है?


सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥३॥

अर्थ: हे नारायणी! आप सभी मंगलों में परम मंगलमयी हैं। आप कल्याणस्वरूपा और सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। हे शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी देवी! आपको मेरा नमस्कार है।


शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥४॥

अर्थ: हे नारायणी देवी! आपकी शरण में आए दीन-दुःखी और पीड़ित लोगों की रक्षा करने में आप सदैव तत्पर रहती हैं। आप सभी के दुःख दूर करने वाली हैं। हे देवी! आपको बारंबार नमस्कार है।


सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥५॥

अर्थ: हे दुर्गा देवी! आप सभी स्वरूपों में विद्यमान हैं। आप समस्त जगत की अधीश्वरी और सभी शक्तियों से संपन्न हैं। हे देवी! हमें सभी प्रकार के भय से बचाइए। आपको नमस्कार है।


रोगानशेषानपहंसि तुष्टा।
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां।
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥६॥

अर्थ: हे देवी! प्रसन्न होने पर आप सभी रोगों का नाश कर देती हैं और अप्रसन्न होने पर मनुष्यों की सभी इच्छित कामनाओं को पूर्ण नहीं होने देतीं। आपकी शरण में आए हुए लोगों पर विपत्ति नहीं आती। आपकी शरण लेने वाले भक्त स्वयं भी दूसरों को सहारा देने वाले बन जाते हैं।


सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥७॥

अर्थ: हे तीनों लोकों की परमेश्वरी देवी! आप संसार की सभी बाधाओं और कष्टों को शांत करें तथा इसी प्रकार हमारे शत्रुओं का नाश करें।

॥ इति श्री सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम् ॥ 

🙏 महत्वपूर्ण नोट: यह माँ जगदम्बा की स्तुति है। माँ का स्वरूप अत्यंत कोमल और दयालु है। आप दूसरों पर दया करें, मेहनत और निष्ठा से अपना कार्य करें। ऐसी भावना रखें कि माँ प्रसन्न होकर आपको कार्य करने और जीवन जीने का सही मार्ग दिखाएँ तथा प्रगति करने की प्रेरणा दें। 🙏
॥ जय माता दी ॥

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