॥શ્રી ગણેશાય નમઃ॥ ॥ श्री विष्णवे नमः ॥ श्री विष्णु अष्टाविंशति स्तोत्र भगवान श्री विष्णु को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और पवित्र स्तोत्र है। इस स्तोत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को २८ दिव्य नामों का महत्व समझाया है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी के दिन इन २८ नामों का जप करता है, उसके सर्व पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। ॥ अथ श्री विष्णु अष्टाविंशति नाम स्तोत्रम् ॥ अर्जुन उवाच किं नु नाम सहस्राणि जपते च पुनः पुनः। यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव॥ १॥ अर्थ: अर्जुन ने कहा - हे केशव! भगवान के हजारों नामों में से किन दिव्य नामों का बार-बार जप करना चाहिए? श्री भगवानुवाच मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम्। गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम्॥ २॥ अर्थ: भगवान श्रीकृष्ण बोले - मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन, जनार्दन, गोविन्द, पुण्डरीकाक्ष, माधव और मधुसूदन। पद्मनाभं सहस्राक्षं वनमालिं हलायुधम्। गोवर्धनं हृषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम्॥ ३॥ अर्थ: पद्मनाभ, सहस्राक्ष, वनमाली, हलायुध, गोवर्धन, हृषीकेश, वैकुण्ठ और पुरुषोत्तम। विश्वरू...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने विचार, सुझाव या अनुभव नीचे टिप्पणी बॉक्स में लिखें